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बाल-ओ-पर भी गए बहार के साथ अब तवक़्क़ो नहीं रिहाई की

The springtime departed with the leaves and the birds, Now, the release (or freedom) is not available.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

बाल-ओ-पर के साथ बहार चली गई है, इसलिए अब मुक्ति (या छुटकारा) पाना संभव नहीं है।

विस्तार

यह शेर जीवन की उस कड़वी सच्चाई को बयां करता है, जहाँ हर चीज़ का वक़्त होता है। शायर कहते हैं कि जैसे बहार आने से पत्तियाँ, बाल, और पंख भी चले जाते हैं... उसी तरह जीवन से उम्मीदें भी चली जाती हैं। जब प्रकृति का यह चक्र पूरा हो जाता है, तो इंसान के दिल में किसी भी तरह की आज़ादी की तवक्क़ोबाक़ी नहीं रहती। यह एक गहरे, निश्छल ग़म का इज़हार है।

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