कुछ रंज-ए-दिली 'मीर' जवानी में खिंचा था — मीर तक़ी मीर

कुछ रंज-ए-दिली 'मीर' जवानी में खिंचा था ज़र्दी नहीं जाती मिरे रुख़्सार से अब तक

“Some sorrow of the heart, 'Mir', was drawn in youth, But the yellowing does not leave my cheek even till now.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

कुछ दिल का गम, 'मीर', जवानी में खींचा था, पर पीलापन अभी तक मेरे गाल से नहीं जाता।

विस्तार

यह शेर बताता है कि दिल का दर्द कितना गहरा होता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि जवानी में जो रंज-ए-दिली खिंचा था, उसकी निशानी अब भी चेहरे से नहीं जाती। यह पीलापन कोई शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि उस भावनात्मक घाव का गहरा असर है जो वक़्त के साथ भी मिटता नहीं। यह यादों के बोझ और दर्द की अमरता का एहसास है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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