वहशत थी हमें भी वही घर-बार से अब तक — मीर तक़ी मीर

वहशत थी हमें भी वही घर-बार से अब तक सर मारे हैं अपने दर ओ दीवार से अब तक

“We too have been afflicted by the sorrow of our homes and kin, Our heads have been struck by our own doorways and walls until now.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हमें भी अपने घर-बार के दुःख से अब तक वहशत हुई है, और अपने ही दरवाज़ों और दीवारों से अब तक सिर मार चुके हैं।

विस्तार

यह शेर अंदरूनी दर्द की पराकाष्ठा को दिखाता है। शायर कहते हैं कि घर-बार से बिछड़ने का गम, या वहशत, तो कुछ भी नहीं है। असली दर्द तो तब होता है जब इंसान खुद से लड़ता है—जब वो अपने ही दर और दीवार से सिर टकराता है। यह दर्द बाहरी नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है, जो हमें अंदर से तोड़ देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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