ख़ुदा जाने कि दुनिया में मिलें उस से कि 'उक़्बा में मकाँ तो 'मीर'-साहिब शोहरा-ए-आलम हैं ये दोनों

“God knows if I will meet him in this world, in 'Uqba's dwelling, for 'Mir Sahib' is the fame of the world, these two.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

ख़ुदा जाने कि दुनिया में मिलें उस से कि 'उक़्बा में मकाँ तो 'मीर'-साहिब शोहरा-ए-आलम हैं ये दोनों। (अर्थ: ईश्वर जाने कि इस दुनिया में मैं उससे मिल पाऊँगा या नहीं, क्योंकि 'उक़्बा' के घर में तो 'मीर' साहब ही दुनिया की शोहरत हैं, ये दोनों मिलकर।)

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी भावना को दर्शाता है। शायर किसी प्रियजन से मिलने की अपनी अनिश्चितता बयान कर रहे हैं, लेकिन अचानक बात को अपनी पहचान की तरफ मोड़ देते हैं। वह कहते हैं कि जिस जगह का ज़िक्र है, वहाँ तो 'मीर' साहब की शोहरत ही पूरे आलम की शोहरत है! यह अपनी कला और अपनी रुय्यत के बारे में एक शानदार बयान है।

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