तेरा रुख़-ए-मुख़त्तत क़ुरआन है हमारा
बोसा भी लें तो क्या है ईमान है हमारा
“Your face is a lovely Quran to us, What is our faith if we even kiss it?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तुम्हारा चेहरा हमारे लिए एक सुंदर कुरान है; यदि हम इसे चूम भी लें तो भी हमारा ईमान क्या है।
विस्तार
यह शेर उस प्रेम की गहराई को बयां करता है जो इबादत के करीब है। शायर महबूब के चेहरे की तुलना क़ुरान से करते हैं, मानो उनकी उपस्थिति ही कोई पवित्र ग्रंथ हो। और दूसरी लाइन में एक सवाल है—अगर हम उस पवित्रता को छू भी लें, तो क्या हमारा ईमान टूटेगा? यह जुनून और विश्वास का एक अनोखा संगम है।
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