सख़्त काफ़िर था जिन ने पहले 'मीर'
मज़हब-ए-इश्क़ इख़्तियार किया
“The 'Mir' who once was a staunch infidel, Chose the religion of divine love.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जिन 'मीर' ने पहले कठोर काफ़िर होना, अब इश्क़ का धर्म अपना लिया।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा के अपने साहित्यिक सफ़र की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि पहले लोग उन्हें 'मीर' के नाम से नहीं पहचानते थे, या शायद वो उन्हें कफ़िर समझते थे। लेकिन जब उन्होंने इश्क़ को अपना धर्म बना लिया... तब उनकी पहचान बन गई! यह शेर बताता है कि कला और प्रेम, किसी भी बाहरी आलोचना से ज़्यादा शक्तिशाली होते हैं।
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