हुआ हूँ तंग बहुत कोई दिन में सिन लीजो
कि जी से हाथ उठा कर वो उठ गया न रहा
“I am very troubled, someone please take care of me, for the one who raised their hand against me, I could not lift myself.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मैं बहुत परेशान हूँ, कोई दिन में मेरी मदद करे, क्योंकि जिस व्यक्ति ने मेरे हाथ उठाया, मैं स्वयं नहीं उठ पाया।
विस्तार
यह शेर एक गहरे भावनात्मक दर्द को बयां करता है। शायर यहाँ किसी से तंग होने की बात कर रहे हैं, लेकिन असल दर्द उस जुदाई का है जो झगड़े के बाद होती है। शायर कहते हैं कि झगड़ा तो सह लिया, लेकिन जब वो व्यक्ति हाथ उठाकर भी चला गया.... तो दिल टूट गया। यह विरह का दर्द है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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