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अब जहाँ आफ़्ताब में हम हैं
याँ कभू सर्व ओ गुल के साए थे

Now, in the blazing sun, we are; / Where once, all was in the shadow of the rose.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अब हम जहाँ तेज़ धूप में हैं, वह जगह कभी गुलाब की परछाईं में हुआ करती थी।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरा बदलाव बयान करता है। 'गुल के साए' यानी सुकून, आराम, और वो खूबसूरत दौर जब हम महफूज़ थे। लेकिन अब शायर कहते हैं कि हम 'आफ़ताब में' हैं। इसका मतलब है कि हम खुली धूप में हैं—वो जगह जहाँ कोई छाँव नहीं है। यह ज़िंदगी के उस मोड़ को दिखाता है, जहाँ हमें सच्चाई का सामना करना पड़ता है, भले ही वो कड़वी क्यों न हो।

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