नक़्श बैठे है कहाँ ख़्वाहिश-ए-आज़ादी का — मीर तक़ी मीर
नक़्श बैठे है कहाँ ख़्वाहिश-ए-आज़ादी का
नंग है नाम रिहाई तिरी सय्यादी का
“Where has the desire for freedom settled? The name of your liberation is bare.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आज़ादी की चाहत कहाँ बस गई है? तुम्हारे इस शासन से मुक्ति का नाम तो खाली है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरी उलझन को बयान करता है। शायर पूछ रहे हैं कि आज़ादी की ख़्वाहिश कहाँ है? ऐसा इसलिए क्योंकि 'रिहाई' का नाम ही नंगा पड़ चुका है। इसका मतलब है कि महबूब का जादू या ज़ुल्म (tyranny) इतना गहरा है कि आज़ादी की कोई गुंजाइश ही नहीं बची। यह भावनात्मक क़ैद और उसके विरोधाभास को दर्शाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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