इश्क़ ही गिर्या-ए-नदामत है वर्ना आशिक़ को चश्म-ए-ख़िफ़्फ़त है

“Love itself is the stream of regret, Otherwise, the lover possesses the eye of indifference.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

इश्क़ ही पछतावे का सैलाब है, अन्यथा आशिक़ को बेपरवाह की आँखें हैं।

विस्तार

यह शेर प्रेम की उस कड़वी सच्चाई को बयां करता है, जहाँ दर्द और प्यार एक-दूसरे में घुले हुए हैं। शायर कहते हैं कि इश्क़ में जो तड़प, जो पछतावा होता है, वह प्यार का ही हिस्सा है। अगर प्यार में यह गम का एहसास न होता, तो आशिक को किसी चीज़ का डर ही क्यों होता? यह प्रेम की गहराई का आईना है।

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