दूर तुझ से 'मीर' ने ऐसा तअब खींचा कि शोख़
कल जो मैं देखा उसे मुतलक़ न पहचाना गया
“From you, 'Mir' drew such torment that the glorious Yesterday's sight, I could not recognize as whole.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आपसे 'मीर' ने ऐसा तड़प खींचा कि शोख़ कल जो मैंने देखा, उसे मैं मुतलक़ नहीं पहचान पाया।
विस्तार
यह शेर तड़प और इश्क़ के असर को बहुत गहराई से समझाता है। मीर कहते हैं कि महबूब की याद से जो तड़प और बेचैनी पैदा होती है, वह इतनी ज़बरदस्त होती है कि शायर की अपनी नज़रों का धोखा हो जाता है। वह जो कुछ भी देखता है, उसे वह पहले जैसा नहीं पहचान पाता। यह प्रेम की उस अवस्था को दिखाता है जहाँ भावनाएँ सच्चाई पर हावी हो जाती हैं।
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