न पूछ अपनी मज्लिस में है 'मीर' भी याँ
जो होगा तो जैसे गुनहगार होगा
“Do not ask if 'Mir' is also present in this gathering; whoever is here will seem like a culprit.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मजलिस में यह मत पूछो कि 'मीर' भी यहाँ है या नहीं; जो भी होगा, वह दोषी प्रतीत होगा।
विस्तार
यह शेर सिर्फ मज्लिस की बात नहीं करता, बल्कि इंसान के अंदर की उलझन को बयां करता है। शायर कहते हैं कि कभी-कभी अपनी ही जगह, अपनी ही महफ़िल में भी, हमें ऐसा महसूस होता है जैसे हम कोई गलती कर रहे हैं। यह आत्म-जागरूकता का बोझ है—यह एहसास कि बस मौजूद रहना भी गुनाहगार जैसा लगता है। कितना गहरा दर्द है, है ना!
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