मस्जिद में इमाम आज हुआ आ के वहाँ से
कल तक तो यही 'मीर' ख़राबात-नशीं था
“Today, the Imam came to the mosque, from there, Until yesterday, 'Mir,' I was the ruin-dweller.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मस्जिद में इमाम आज आया, वहाँ से। कल तक तो यही 'मीर' ख़राबात-नशीं था।
विस्तार
देखिए, यह शेर सिर्फ़ एक बात नहीं कह रहा, बल्कि एक बड़ी विडंबना (irony) को बयां करता है। शायर ने अपनी ही ज़िंदगी को आईने में देखा है। इमाम का मस्जिद से आना पवित्रता का प्रतीक है, लेकिन मीर कहते हैं कि कल तक तो उनकी अपनी 'ख़राबात-नशी' ज़िंदगी ही सबसे बड़ी कहानी थी! यह एक गहरा आत्म-मज़ाक है। शायर अपनी बेबाकी और अपनी गिरती इज़्ज़त को इस तरह से बयान कर रहे हैं कि सुनने वाला दंग रह जाए।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
← Prev7 / 7
