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सर्द-मेहरी की बस-कि गुल-रू ने
ओढ़ी अब्र-ए-बहार ने भी शाल

The garden of cold Mehari, graced by the bloom-colored hue, Has draped itself in a shawl of cloud-like spring.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ठंड की महक वाले गुल-रू ने, अब बहार के बादल ने भी शाल ओढ़ ली।

विस्तार

यह शेर महबूब के दिल की उस अथाह ठंडक को बयान करता है, जो किसी भी मौसम के रंग से बेपरवाह है। शायर कहते हैं कि यह शीतलता इतनी गहरी है कि वसंत का पूरा आवरण, जो अपने आप में सबसे गर्म होता है, भी इसे ओढ़ नहीं पाया। यह उस मोहब्बत के दर्द को दिखाता है, जहाँ महबूब का दिल इतना पत्थर जैसा हो गया है कि प्रकृति की सुंदरता भी बेअसर है।

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