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सब्ज़ा-नौ-रस्ता रहगुज़ार का हूँ
सर उठाया कि हो गया पामाल

I am the path, the passage of the street, the way, But when I lifted my head, I was utterly undone.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैं सब्ज़ा-नौ-रस्ता, रहगुज़र का हूँ, लेकिन जब मैंने सर उठाया, तो मैं पामाल हो गया।

विस्तार

यह शेर इंसान के अंदर की उलझन को बयान करता है। शायर कहते हैं कि मैं नौ रास्तों का रहगुज़र हूँ, यानी मैं कई तरह का हूँ, मैं एक जगह टिकने वाला नहीं हूँ। लेकिन दूसरा मिसरा बताता है कि जब मैंने अपना सर उठाया, यानी जब मैंने खुद को पहचान लिया, तो मैं बिखर गया! यह एक बहुत गहरा एहसास है कि जब कोई अपनी सच्चाई का सामना करता है, तो वह कैसे अस्त-व्यस्त हो जाता है।

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