'इश्क़ का शोर कोई छुपता है — मीर तक़ी मीर
'इश्क़ का शोर कोई छुपता है
नाला-ए-अंदलीब है गुल-बाँग
“The noise of love hides in a drain, / The garden of flowers is a scented stream.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
इश्क़ का शोर कहीं छिपता है नाला-ए-अंदलीब में, और गुल-बाँग एक महकते हुए नाले जैसा है।
विस्तार
ये शेर इश्क़ की उस ज़बरदस्त और खुली भावना को बयां करता है। शायर कहते हैं कि इश्क़ का शोर कोई छिपा नहीं सकता, क्योंकि ये तो नाला-ए-अंदलीब (मोहब्बत की नदी) में खिले हुए गुल-बाँग की तरह है। मतलब, इश्क़ कोई निजी राज़ नहीं है; ये एक ऐसी ज़ाहिर, इतनी खूबसूरत और इतनी शक्तिशाली चीज़ है कि हर जगह अपनी महक बिखेर देती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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