बात 'अमल की चली ही जाती है — मीर तक़ी मीर

बात 'अमल की चली ही जाती है है मगर औज-बिन-उनुक़ की टाँग

“The talk of action can surely proceed, But the leg without 'auz' and 'unuk' cannot.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

बात (बातचीत) का अमल (कार्य) तो चल ही जाता है, मगर औज और उनुक़ के बिना टाँग नहीं चल सकती।

विस्तार

यह शेर हमें ज़िंदगी की एक बहुत गहरी सच्चाई समझाता है। शायर कहते हैं कि बातों को अमल में लाना, यानी शब्दों को कर्म बनाना, तो आसान है। लेकिन जब बात किसी बहुत नाज़ुक या जटिल चीज़ की आती है—जैसे कि 'औज-बिन-उनुक़ की टाँग'—तो मामला बिलकुल बदल जाता है! इसका मतलब है कि हर चीज़ में एक नज़ाकत होती है, जिसे समझना और निभाना बहुत मुश्किल होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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