कहाँ फिर शोर शेवन जब गया 'मीर' — मीर तक़ी मीर

कहाँ फिर शोर शेवन जब गया 'मीर' ये हंगामा है इस ही नौहागर तक

“Where then is the noise of Shevān when Mir departed? This tumult is merely within this mourning-house.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

कहाँ फिर शोर शेवन जब गया 'मीर', ये हंगामा है इस ही नौहागर तक। इसका शाब्दिक अर्थ है कि जब शेवन का शोर कहीं चला गया, तो यह हंगामा केवल इसी शोक-भरे घर (नौहागर) तक सीमित है।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी के बड़े सच को बयां करता है। शायर कहते हैं कि चाहे कितना भी शोर हो, चाहे कितना भी हंगामा मच जाए, ये सब एक सीमा के अंदर ही होता है। ये दुनिया का कोई भी ड्रामा, कोई भी तमाशा... कहीं न कहीं एक दायरा बनाकर ही रहता है। शायर ने बहुत गहरी बात कह दी है कि हर चीज़ की एक हद होती है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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