दिल जो न था तो रात ज़-ख़ुद-रफ़तगी में 'मीर' — मीर तक़ी मीर

दिल जो न था तो रात ज़-ख़ुद-रफ़तगी में 'मीर' गह इंतिज़ार ओ गाह मुझे इज़्तिराब था

“If my heart were not so deeply attached to you, O Meer, There would be no wait, nor the restless anxiety I feel.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अगर मेरा दिल आप से इतना जुड़ा हुआ नहीं होता, तो रात में यह तन्हा रफ़तगी और यह बेचैनी का इंतज़ार नहीं होता।

विस्तार

इस शेर में मीर तक़ी मीर ने दिल की उस गहरी तन्हाई को बयान किया है। वो कहते हैं कि अगर मेरा दिल होता ही नहीं, तो भी तन्हाई की रात शांति नहीं होती। वो रात हमेशा 'इंतज़ार' और 'इज़्तिराब' से भरी रहती है। यह एक बहुत ही खूबसूरत एहसास है कि इंसान का दिल हमेशा बेचैन रहता है, उसे हमेशा किसी चीज़ की चाहत होती है, भले ही वह चीज़ सामने न हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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