हम गिरफ़्तार-ए-हाल हैं अपने ताइर-ए-पर-बुरीदा के मानिंद

“We are prisoners of our own condition, Like birds whose feathers are damaged.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

हम अपनी ही हालत के कैदी हैं, जैसे वे पंछी जिनके पंख टूटे हुए हैं।

विस्तार

यह शेर उस अहसास को बयां करता है जब इंसान खुद के ही जाल में फँस जाता है। शायर कहते हैं कि हम बाहर से नहीं, बल्कि अपनी 'हाल' में गिरफ़्तार हैं। जैसे कोई पंछी जिसके पंख टूट गए हों, वो उड़ान नहीं भर सकता। यह पंक्तियाँ उस आत्म-बंधन की बात करती हैं, जहाँ इच्छाएं तो हैं, मगर उन्हें पूरा करने की ताक़त नहीं!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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