लगने के लिए दिल के छिड़का था नमक मैं ने — मीर तक़ी मीर

लगने के लिए दिल के छिड़का था नमक मैं ने सौ छाती के ज़ख़्मों ने कल देर मज़ा रखा

“To make my heart taste of salt, I did sprinkle it, The wounds of a hundred chests delayed their pleasure.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

दिल को नमक का स्वाद देने के लिए मैंने छिड़का, और सौ छातियों के ज़ख़्मों ने कल देर तक मज़ा रखा।

विस्तार

यह शेर मोहब्बत के दर्द को एक अनोखे नज़रिए से देखता है। शायर कह रहे हैं कि दिल को चोट पहुँचाना, दर्द महसूस करना, अपने आप में एक कशिश है। जैसे आपने जानबूझकर नमक छिड़का, ताकि दर्द हो। और ये ज़ख़्म... ये ज़ख़्म इतने गहरे थे कि उनका मज़ा तो कई दिनों तक आया।

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