क़तई है दलील ऐ 'मीर' उस तेग़ की बे-आबी — मीर तक़ी मीर

क़तई है दलील ऐ 'मीर' उस तेग़ की बे-आबी रहम उन ने मिरे हक़ में मुतलक़ न रवा रखा

“By no means, O Meer, is the argument the thirst of that sword; / They have not kept compassion for my right unconditional.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अर्थात, ऐ मीर, उस तलवार की प्यास से कोई तर्क नहीं है; उन्होंने मेरे हक़ में दया को मुतलक़ नहीं रखा है।

विस्तार

यह शेर धोखे और वफ़ादारी की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि ज़माने की कोई भी बहस या तकरार अब बेकार है, क्योंकि तलवार तो सूख चुकी है। असली बात तो ये है कि किसी ने मेरे हक़ में रहम रखना छोड़ दिया है। यह दर्द उस टूटे हुए रिश्ते का है, जहाँ सिर्फ़ मुराद किया गया हक़ ही बचा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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