अब तो जाता ही है का'बे को तो बुत-ख़ाने से — मीर तक़ी मीर
“Now, I am leaving for the Kaaba, from this temple of idols; Quickly reach, O 'Mir', for God has entrusted (my soul/fate).”
अर्थ
अब तो का'बे की ओर जा रहा हूँ, इन मूर्ति-मंदिरों से; जल्दी पहुँचना, ऐ 'मीर', क्योंकि ख़ुदा ने (मेरा जीवन/मेरा वजूद) सौंप दिया है।
विस्तार
यह शेर आध्यात्मिक सफ़र और इबादत की गहराई को बयां करता है। शायर मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जब आपका रास्ता काबा की ओर है—जो कि शुद्ध इबादत का प्रतीक है—तो आपको दुनियावी नश्वर चीज़ों (मूर्ति पूजा) को छोड़ देना चाहिए। वे आपको बुलाते हैं, 'मीर,' कि जल्द से जल्द मेरे पास पहुँचो, क्योंकि मेरे पास कोई बहुत बड़ी, कोई ख़ुदा की तरफ़ से दी हुई बात है। यह भौतिकता छोड़कर रूहानी राह अपनाने का आह्वान है।
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