जहाँ को फ़ित्ने से ख़ाली कभू नहीं पाया — मीर तक़ी मीर
“Where it could never be free from tribulation, In our time, the era itself has become a calamity.”
अर्थ
जहाँ को फ़ित्ने से ख़ाली कभू नहीं पाया, यानी हर जगह को कभी भी फ़ितने से मुक्त नहीं किया जा सका। हमारे वक़्त में तो आफ़त ज़माना हुआ, जिसका अर्थ है कि हमारे समय में तो पूरा ज़माना ही एक आपदा बन गया है।
विस्तार
यह शेर मानव जीवन और समाज की अशांति पर एक गहरा तंज़ है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि इस दुनिया में कोई भी जगह फ़ितने से कभी ख़ाली नहीं रह पाई। इसलिए, शायर कहते हैं कि हमारा वक़्त तो बस आफ़त का ज़माना बन चुका है। यह सिर्फ एक शिकायत नहीं है, बल्कि इंसान की ज़िंदगी के कड़वे सच का बयान है।
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