हसरत उस की जगह थी ख़्वाबीदा — मीर तक़ी मीर

हसरत उस की जगह थी ख़्वाबीदा 'मीर' का खोल कर कफ़न देखा

“The longing was for her, the dream-weaver, 'Mir' saw the shroud of his own existence.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हसरत उस की जगह थी ख़्वाबीदा, 'मीर' ने जब अपने खोलकर कफ़न को देखा।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी और मौत के रिश्ते को बहुत गहराई से समझाता है। शायर कह रहे हैं कि जिस चाहत (hasrat) में हम जीते हैं, वो किसी जगह की मोहताज नहीं थी। जब उनका कफ़न खोला गया, तो जो नज़ारा सामने आया, वो सिर्फ़ एक खालीपन था। यह दिखाता है कि दर्द किसी जगह का नहीं, बल्कि रूह का हिस्सा होता है।

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