ख़ुश रहा जब तलक रहा जीता
'मीर' मा'लूम है क़लंदर था
“How happy he was while he was alive,”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कह रहे हैं कि जब तक वह जीवित था, वह कितना खुश था।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की ज़बरदस्त तसव्वुर से भरा है। शायर कहते हैं कि जो ख़ुशी हमें ज़िन्दगी में मिलती है, वो बस एक पड़ाव है, एक अस्थायी एहसास। असली हक़ीक़त... वो 'क़लंदर' वाली रूह है, जो हमेशा से मौजूद है। ये शेर हमें याद दिलाता है कि हमें फ़ानी ख़ुशियों के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपनी असली पहचान को जीना चाहिए।
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