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लाल-ओ-याक़ूत हम ज़र-ओ-गौहर
चाहिए जिस क़दर मयस्सर था

As much as we desired the red and sapphire, the silver and gems, So much was it available to us.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

लाल और नीलम, हम चाँदी और रत्न, उतना ही चाहिए जितना हमारे लिए उपलब्ध था।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरा है। शायर मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि हम की क़ीमत.... हमारे पास की आसानी पर निर्भर करती है। जैसे ये कीमती पत्थर (लाल और माणिक), हम भी बस उतने ही क़रूल थे.... जितने को आसानी से पाया जा सके। यह एक दर्दनाक एहसास है कि कहीं प्यार और चाहत का पैमाना.... हमारी पहुँच पर टिका होता है। यह एहसास बहुत रूहानी है।

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