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साहिब-ए-जाह-ओ-शौकत-ओ-इक़बाल इक अज़ाँ जुमला अब सिकंदर था

Oh master of glory, splendor, and Iqbal, Now a single call to prayer, and Alexander was.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

शायर से कहते हैं कि एक अज़ान की आवाज़ मात्र से सिकंदर का दौर आ गया।

विस्तार

यह शेर महज़ एक बदलाव को बयां करता है। शायर साहब कह रहे हैं कि ज़माना, जो कभी महँगे दिखावे, शानो-शौकत और बड़े-बड़े इक़बालों से भरा था, अब वो सब कुछ सिमट कर बस एक सादी, पवित्र आवाज़ बन गई है। वो आवाज़ है अज़ान की... जो बताती है कि असलियत, दिखावे से कहीं ज़्यादा गहरी और ज़रूरी होती है।

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