मज्लिस-ए-आफ़ाक़ में परवाना साँ — मीर तक़ी मीर
मज्लिस-ए-आफ़ाक़ में परवाना साँ
'मीर' भी शाम अपनी सहर कर गया
“In the gathering of the horizons, the lamp, the moth, the night itself, even 'Mir', has transformed into dawn.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आفاق के महफ़िल में परवाना साँ, 'मीर' ने स्वयं अपनी शाम को सवेरा बना दिया।
विस्तार
यह शेर एक असाधारण आत्मविश्वास और कलात्मक विद्रोह को बयां करता है। परवाना (मच्छर) का मतलब है कि कवि का आशिक़ या कला। शायर कहते हैं कि महफ़िल-ए-आफ़ाक़ में परवाना है, और मैं, मीर, अपनी शाम को ही सुबह में बदल गया। इसका मतलब है कि शायर की उपस्थिति इतनी शक्तिशाली है कि वह सबसे अंधेरे समय को भी रौशनी में बदल सकती है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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