पलकों से तेरी हम को क्या चश्म-दाश्त ये थी
इन बर्छियों ने बाँटा बाहम जिगर हमारा
“From your lashes, what memory did we glean? These sharp arrows divided our hearts between.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तुम्हारी पलकों से हमने क्या याददाश्त ली? इन तीरों ने हमारे दिल को बाँट दिया।
विस्तार
देखिए, शायर यहाँ एक बहुत ही गहरा फ़र्क़ बता रहे हैं। वह कहते हैं कि तुम्हारी पलकों की खूबसूरती, तुम्हारी निगाहें... ये सब हमारे लिए क्या मायने रखती थीं? वो किसी बाहरी चीज़ को दोष नहीं दे रहे हैं। बल्कि ये कह रहे हैं कि असली दर्द तो कहीं और से आया। ये 'बर्छियाँ' कोई तलवार नहीं हैं, ये वो दिल के ज़ख़्म हैं जो मोहब्बत ने दिए, और इन्हीं ज़ख़्मों ने हमारे जिगर को दो हिस्सों में बाँट दिया!
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