इक चश्म-ए-मुंतज़र है कि देखे है कब से राह जों ज़ख़्म तेरी दूरी में नासूर हो गया

“There is an eye of anticipation, waiting to see when the path will appear, The wound of your distance has become a chronic sore.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

एक इंतज़ार भरी आँख है जो कब से राह देखे, / तेरे दूरी के ज़ख्म नासूर बन गए।

विस्तार

यह शेर इंतज़ार की उस पीड़ा को बयान करता है जो समय के साथ और गहरी होती जाती है। शायर कहते हैं कि एक आँख बस राह तक रही है... कब से। और इस इंतज़ार की वजह क्या है? क्योंकि महबूब की दूरी ने एक छोटे से ज़ख्म को... एक नासूर बना दिया है। यह दर्द का वो आलम है, जो वक़्त के साथ लगातार बढ़ता जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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