अफ़्सोस 'मीर' वे जो होने शहीद आए — मीर तक़ी मीर
अफ़्सोस 'मीर' वे जो होने शहीद आए
फिर काम उन का उस की तलवार तक न पहुँचा
“Alas, Mir, those who came to be martyred, Their deeds did not even reach the edge of the sword.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अफ़सोस, मीर! जो लोग शहीद होने आए, उनके कर्म उनकी तलवार तक पहुँच नहीं पाए।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी की उस कड़वी सच्चाई को बयान करता है, जहाँ बहुत ज़ोर लगा दिया जाता है, बहुत बलिदान दिया जाता है, लेकिन कामयाबी उस मुकाम तक पहुँच ही नहीं पाती। शायर कहते हैं कि चाहे आप कितने भी शहीद क्यों न हों, आपकी मेहनत का फल तो बस तलवार के किनारे पर ही रह जाता है। यह एक गहरे निराशा और अधूरेपन का एहसास है।
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