बैठ कर 'मीर' जहाँ ख़ूब न रोया होवे — मीर तक़ी मीर
बैठ कर 'मीर' जहाँ ख़ूब न रोया होवे
ऐसी कूचे में नहीं है तिरे जानाँ यक जा
“O Beloved, where you have never shed tears while sitting, Such a street does not exist for your passing.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कहता है कि हे प्रियतम, ऐसी कोई गली नहीं है जहाँ बैठकर आँसू न बहाए हों।
विस्तार
इस शेर में मिर्ज़ा ने एक तरह का भावनात्मक मज़ाक किया है। शायर कहते हैं कि ऐसी कोई जगह नहीं है, जहाँ दिल को रोने से रोका जा सके। यह एक चुनौती है.... कि क्या कोई एहसास इतना गहरा होता है कि आंसू न आएं! यह शेर बताता है कि दर्द और भावनाएं कभी भी किसी को छोड़ती नहीं हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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