फिरता है 'मीर' तो जो फाड़े हुए गरेबाँ — मीर तक़ी मीर
“When Meer wanders, from whose torn garment Which cruel tyrant pulled the curtain of my beloved?”
अर्थ
जब मीर घूमता है, तो किसके फटे हुए वस्त्र हैं, किस क्रूर अत्याचारी ने मेरे प्रिय के पल्लू को खींचा।
विस्तार
यह शेर भटकते हुए और इश्क़ की बेवफ़ाई के दर्द को बयां करता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि अगर मैं इन फटे हुए, टूटे हुए लिबास में भटक रहा हूँ, तो यह मेरी गलती नहीं है। वो पूछते हैं कि किस क्रूर दिल वाले ने मेरे महबूब के दामन को खींचा? इसका मतलब है कि यह दर्द कहीं से नहीं आया; यह महबूब के ही लापरवाह आचरण का नतीजा है, जिसने आशिक को बेबस और भटकने पर मजबूर कर दिया।
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