था बद-शराब साक़ी कितना कि रात मय से — मीर तक़ी मीर
था बद-शराब साक़ी कितना कि रात मय से
मैं ने जो हाथ खींचा उन ने कटार खींचा
“Oh, the cupbearer, how much wine did you pour that night? From the hand I pulled, they drew a dagger.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शराबी साक़ी ने उस रात मय से कितना पिलाया कि जब मैंने हाथ खींचा, तो उन्होंने कटार खींच ली।
विस्तार
ये शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब का है, और ये वफ़ा और धोखे की कहानी कहता है। शायर कहते हैं कि साक़ी (जावेद) कितना मदहोश था.... कि जब मैंने उसका हाथ पकड़ा.... तो उसने कटार खींच ली! ये एक गहरे विश्वासघात को दिखाता है, जब सबसे करीबी लोग भी अचानक ज़ख्म दे जाते हैं। ये रिश्तों की कड़वी सच्चाई है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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