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कुछ कम नहीं हैं शोबदा-बाज़ों से मय-गुसार दारू पिला के शैख़ को आदम से ख़र किया

The tavern-rovers are not few, the wine-givers of intoxication, They made the sheikh to abandon his god with wine.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

शोबदा-बाज़ों से मय-गुसार कम नहीं हैं; उन्होंने शराब पिलाकर शैख़ को अपने ईश्वर से विमुख कर दिया।

विस्तार

यह शेर चालाकी और छल की कला पर बात करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि शोबदा-बाज़ों का मय-गुसार (शराब पीकर तंग करने) का हुनर... किसी अदम द्वारा शैख़ को दारू पिलाने जितना ही कमाल का है। शायर यहाँ दुनिया की उस चालाकी पर तंज़ कर रहे हैं, जो दिखने में आसान लगती है, पर असल में एक बड़ी कला है। यह इल्यूजन और हुनर का बेहतरीन तख़ल्लुस है।

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