न बहके मय-कदे में 'मीर' क्यूँकर — मीर तक़ी मीर
न बहके मय-कदे में 'मीर' क्यूँकर
गिरो सौ जा है पैराहन हमारा
“Meer, why should my garland fall in the river, When my shawl is meant for the ground?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मीर, मेरे हार को नदी में क्यों गिराओ, जब मेरा पल्लू ज़मीन के लिए है।
विस्तार
यह शेर बस महफ़िल में मदहोशी का नशा नहीं है.... यह तो इश्क़ की उस बेबाक मस्ती की बात है! शायर हमें कह रहे हैं कि दिल को बहकने देना.... उस नशे में डूब जाना! क्योंकि ये जो 'पैराहन' है.... ये हमारी रूह है.... हमारी पहचान है! गिरना-उठना तो मोहब्बत का हिस्सा है.... बस हिम्मत नहीं हारनी!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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