शराब-ए-ऐश मयस्सर हुई जिसे इक शब — मीर तक़ी मीर
शराब-ए-ऐश मयस्सर हुई जिसे इक शब
फिर उस को रोज़-ए-क़यामत तलक ख़ुमार रहा
“The wine of revelry became available to him one night, Yet the intoxication remained until the Day of Judgment.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
एक रात उसे ऐश की शराब मिल गई, और उसका नशा क़यामत के दिन तक बना रहा।
विस्तार
मिर्ज़ा तक़ी मीर ने यहाँ उस एहसास को बयान किया है, जो एक पल की खुशी या एक रात के मयस्सर होने के बावजूद, हमेशा के लिए दिल में बस जाता है। यह शेर कहता है कि जीवन में कभी-कभी ऐसा नशा होता है, जो एक रात का होता है, लेकिन उसका असर... आपकी रूह को क़यामत तक ख़ुमार में रखे रखता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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