गली में उस की गया सो गया न बोला फिर — मीर तक़ी मीर

गली में उस की गया सो गया न बोला फिर मैं 'मीर' 'मीर' कर उस को बहुत पुकार रहा

“In the alley, the one who was sleeping did not wake up, nor did he speak; I, 'Mir,' 'Mir,' was calling him repeatedly.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

गली में वह गया और सो गया, और फिर न बोला; मैं 'मीर' 'मीर' कहकर उसे बार-बार पुकार रहा था।

विस्तार

यह शेर बिछड़ने के दर्द को बहुत गहराई से बयां करता है। शायर कहते हैं कि वह गली में खड़े होकर, जिसे अपना मानती है, बार-बार उसका नाम पुकार रहे हैं, लेकिन वह जागी नहीं... न ही कोई जवाब मिला। यह एक बहुत ही दर्दभरा नज़ारा है, जहाँ मोहब्बत की पुकार सिर्फ़ एकतरफा रह जाती है। यह शेर हमें तन्हाई और बेबस इंतज़ार का एहसास कराता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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