नुमूद कर के वहीं बहर-ए-ग़म में बैठ गया — मीर तक़ी मीर

नुमूद कर के वहीं बहर-ए-ग़म में बैठ गया कहे तो 'मीर' भी इक बुलबुला था पानी का

“Having poured (his heart) there, he sat in the wave of sorrow, Said, 'Even Meer was just a bubble of water.'”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

नमूद कर के वहीं बहर-ए-ग़म में बैठ गया, कहे तो 'मीर' भी इक बुलबुला था पानी का। (अर्थ: अपना सब कुछ उंडेलकर वह ग़म के सागर में बैठ गया और कहने लगा कि 'मीर' भी तो बस पानी का एक बुलबुला था।)

विस्तार

यह शेर जीवन की नश्वरता और ग़म की गहराई पर एक गहरा चिंतन है। शायर कहते हैं कि वे ग़म के समंदर में बैठे हैं, लेकिन जब उनसे पूछा जाता है, तो उनका जवाब चौंकाने वाला होता है। वह कहते हैं कि मैं तो बस पानी का एक बुलबुला हूँ। इसका मतलब है कि जीवन का सबसे बड़ा दर्द भी, और सबसे महान कलाकारी भी, अंत में क्षणभंगुर और अस्थाई होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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