शब था नालाँ अज़ीज़ कोई था — मीर तक़ी मीर

शब था नालाँ अज़ीज़ कोई था मुर्ग़-ए-ख़ुश-ख़्वाँ अज़ीज़ कोई था

“Was there a beloved canal, was there a beloved bird?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

क्या कोई प्यारा नाला था, क्या कोई प्यारा पक्षी था।

विस्तार

यह शेर उस गहरे खालीपन को बयां करता है, जब ज़िंदगी अधूरी लगती है। शायर कहते हैं कि जीवन में दो चीज़ों की कमी महसूस होती है—या तो कोई प्यारी रात, या कोई खुशनुमा हमसफ़र। यह सिर्फ़ किसी व्यक्ति को याद करना नहीं है, बल्कि उस भावनात्मक माहौल और उस सादगी भरे साथ को याद करना है जो ज़िंदगी को सहने लायक बनाता है। यह एक बहुत ही गहरा एहसास है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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