“From the letter, the strength of your beauty's veil has now lessened, The desire for Joseph was like that, now it has become the desire for Rustam.”
पत्र से वो ज़ोर सफ़ा-ए-हुस्न अब कम हो गया, चाह-ए-यूसुफ़ था ज़क़न सो चाह-ए-रुसतम हो गया। इसका अर्थ है कि पत्र पढ़कर सुंदरता के पर्दे का प्रभाव अब कम हो गया है, और जो चाहत पहले यूसुफ जैसी थी, वह अब रुस्तम जैसी हो गई है।
यह शेर महबूब के हुस्न और आशिक़ के ज़ेहन में हो रहे बदलाव को बयां करता है। शायर कहते हैं कि ख़त से जो नज़ाकत भरी खूबसूरती का ज़ोर था, वो अब कम हो गया है। यह चाहत यूसुफ़ की तरह कोमल नहीं रही, बल्कि रुस्तम जैसी एक ज़ोरदार, हवस भरी चाहत बन गई है। यह इल्म है कि इश्क़ का रूप समय के साथ कैसे बदल जाता है।
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