ख़ूब थे वे दिन कि हम तेरे गिरफ़्तारों में थे
ग़म-ज़दों अंदोह-गीनों ज़ुल्म के मारों में थे
“How wonderful were those days when we were in your captivity, when we were among the sorrowful, melancholic, and oppressed by cruelty.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
वे दिन बहुत अच्छे थे जब हम तुम्हारे बंधक थे, जब हम दुःख से भरे, उदास और अत्याचार के शिकार लोगों के बीच थे।
विस्तार
मीर तक़ी मीर यहाँ एक बहुत ही मीठी उदासी का एहसास करा रहे हैं। शायर कह रहे हैं कि वो दिन कितने ख़ूब थे, जब हम महबूब के क़ैद में थे। यह क़ैद सिर्फ़ शारीरिक नहीं थी, बल्कि एक भावनात्मक बंधन था। हम सब मिलकर ग़म में, उदासी में, और ज़ुल्म के शिकार थे, और इसी साझा दर्द में हमें एक अजीब सा सुकून मिलता था।
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