Sukhan AI
जिस से उसे लगाऊँ रूखा ही हो मिले है
सीने में जल कर अज़-बस दिल ख़ाक हो गया है

From whom I try to draw, only dryness I receive; My heart, burning in my chest, has turned to dust and leave.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

जिस व्यक्ति से मैं उम्मीद लगाऊँ, मुझे केवल निराशा ही मिलती है; मेरे सीने में जलकर मेरा दिल धूल में मिल गया है।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ किसी के रूखे व्यवहार की बात नहीं करता.... यह दिल के अंदर की उस आग की बात करता है! जब दर्द इतना गहरा हो जाए कि आपको लगे कि आपका दिल जलकर राख हो गया है... ऐसा दर्द जो किसी उम्मीद की वजह से होता है.... यह ग़म का वह स्तर है, जहाँ आप टूटने को भी एक नियति मान लेते हैं।

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पाठ
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