हुसूल काम का दिल-ख़्वाह याँ हुआ भी है समाजत इतनी भी सब से कोई ख़ुदा भी है

“Be it the quest of love, or the heart's desire, a yearning remains; / For in society, there is still a God for all.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

प्रेम की चाहत हो या दिल का ख्वाहिश, एक तड़प बाकी है; समाज में सबके लिए कोई ख़ुदा भी है।

विस्तार

यह शेर इंसान की इच्छा और नियति के बीच के गहरे रिश्ते को समझाता है। शायर कहते हैं कि चाहे हम अपनी हर ख्वाहिश पूरी कर लें, या अपनी मंज़िल पा लें... फिर भी एक सीमा है। यह सीमा कोई और नहीं, बल्कि ख़ुदा की बनाई हुई 'समाजत' है। यह हमें सिखाता है कि हमारी चाहत कितनी भी बड़ी क्यों न हो, एक रूहानी दायरा होता है, जिसे पार करना मुमकिन नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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