Sukhan AI
उमीद-ए-रहम उन से सख़्त ना-फ़हमी है आशिक़ की
ये बुत संगीं-दिली अपनी न छोड़ें गर ख़ुदा आवे

The hope of mercy is a harsh misunderstanding for the lover, If God comes, my devoted heart will not abandon this idol.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

आशिक़ के लिए रहमत की उम्मीद एक कड़वा भ्रम है, और अगर ईश्वर आएगा, तो मेरा समर्पित हृदय इस मूर्ति को नहीं छोड़ेगा।

विस्तार

यह शेर इंसान की उम्मीद और लगाव की ज़िद को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि महबूब से रहम की उम्मीद रखना अक्सर एक गहरी ग़लतफ़हमी होती है। लेकिन दूसरी पंक्ति में एक गहरा सच है: हम अपने बुत, अपने झूठे लगाव से इतने चिपके होते हैं कि जब खुदा का वस्ल होता है, तब भी हम उन्हें नहीं छोड़ पाते। यह भावनात्मक उलझन का अद्भुत वर्णन है।

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