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रात गुज़रे है मुझे नज़्अ' में रोते रोते
आँखें फिर जाएँगी अब सुब्ह के होते होते

I spent the night weeping in remembrance's verse, My eyes will open with the coming of the dawn's curse.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

रात गुज़ारते हुए मैं नज़्में पढ़ते-पढ़ते रोता रहा, और मेरी आँखें अब सुबह होते ही खुल जाएँगी।

विस्तार

यह शेर बताता है कि कभी-कभी दर्द से निकलने का रास्ता शायरी होती है। शायर कहते हैं कि पूरी रात गुज़री है नज़्में पढ़ते हुए और रोते हुए। लेकिन ये सिर्फ़ एक रात का दर्द है.... क्योंकि वो भी गुज़र जाएगा। यह एक बहुत ही गहरी बात है, कि ज़िंदगी में कितना भी गम क्यों न हो, सुबह का सूरज ज़रूर आता है और सब कुछ ठीक हो जाता है। यह उम्मीद का पैगाम है।

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