तू है बेचारा गदा 'मीर' तिरा क्या मज़कूर — मीर तक़ी मीर
“O poor 'Meer', what can be said of you, When in the dust, sir, how many officers are found.”
अर्थ
हे बेचारे गदा 'मीर', तेरा क्या मज़कूर, जब धूल में साहब अफ़सर कितने मिल गए।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ अपनी बेबसी पर सवाल नहीं उठा रहा है, बल्कि जीवन की एक कड़वी सच्चाई बता रहा है। शायर कहते हैं कि मैं खुद को कितना बेचारा मानता हूँ, लेकिन जब वो ज़मीन की धूल में झाँकते हैं.... तो उन्हें पता चलता है कि कितने बड़े-बड़े लोग, कितने अफ़सर... सब बस राख में मिल चुके हैं। यह शेर हमें सिखाता है कि हमारा दर्द व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक सार्वभौमिक सत्य है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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