अब 'मीर'-जी तो अच्छे ज़िंदीक़ ही बन बैठे
पेशानी पे दे क़श्क़ा ज़ुन्नार पहन बैठे
“Now Mir Sahib has become a poor man indeed, Adorning his forehead with gold-threaded tinsel.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अब मीर साहब तो अच्छे ज़िंदीक़ ही बन गए हैं, और अपने माथे पर सोने की धागे वाली सजावट पहन बैठे हैं।
विस्तार
यह शेर अपने आप में एक गहरा आईना है। मीर साहब कहते हैं कि अब तो वह खुद एक 'ज़िंदीक़' बन गए हैं। ज़िंदाक़ का मतलब है एक प्रतिष्ठित, ऊँचे ओहदे वाला आदमी। उन्होंने अपनी माथे पर एक नकली, दिखावटी चमक ('क़श्क़ा ज़ुन्नार') पहन ली है। यह दिखाता है कि कवि अपने सच्चे, दर्द भरे अंदाज़ से हटकर, अब एक दिखावटी शान दिखाने लगे हैं। यह एक आत्म-निरीक्षण है!
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