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अहल-ए-ज़माना रहते इक तौर पर नहीं हैं हर आन मर्तबे से अपने उन्हें सफ़र है

The people of the era are not always in one state, At every moment, they have a journey from their status.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अहल-ए-ज़माना का एक समय में एक ही मिज़ाज या अवस्था नहीं होता; हर पल उन्हें अपने वर्तमान दर्जे से गुज़रना होता है।

विस्तार

यह शेर मिर् तक़ी मीर साहब की ज़िंदगी के सबसे बड़े सच को बयां करता है: कोई भी चीज़ स्थायी नहीं है। शायर कहते हैं कि इंसान एक जगह टिक कर नहीं रह सकता। हमारा वजूद ही एक सफ़र है, हर पल एक मर्तबे से दूसरे मर्तबे की ओर जाना। यह हमें सिखाता है कि ज़िंदगी हमेशा बदलते रहना है।

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